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सफलता का पहला नियम; भागो मत, सिर्फ जागो

आज के ज़माने में बहुत कम लोगो में ही सच्ची लगन दिखायी देती है । modernization के इस दोर मे सभी लोग सब कुछ फटा फट चाहते। अकसर हमें अखबारों, न्यूज़ channels में ऐसी खबरे पढ़ने और सुनने को मिलती हैं कि रातोंरात कामयाबी ने कई लोगों के कदम चूमे। ऐसी खबरे देखकर और सुनकर हमारा भी मन करता है की हमे भी वो सब कुछ जल्दी से जल्दी मिले। but हम ये कभी नहीं सोचते की इस के पीछे उन्होंने कितना मेहनत किया है , बस हम सिर्फ उनकी कामयाबी पर धयान देते है !
सच्ची लगन का मतलब है ‘नाकामी या समस्याओं के बावजूद किसी भी हालत मे अपने मकसद या काम में मज़बूती से टिके या लगे रहना।

अल्बर्ट आइन्स्टाइन का प्रारम्भिक जीवन Early Life of Albert Einstein

आइंस्टाइन का जन्म 14 मार्च 1879 को जर्मनी के यूम (Ulm) नगर में एक यहूदी परिवार में हुआ। उनके पिता एक इंजीनियर और सेल्समैन थे। उनकी मां पौलीन आइंस्टीन थी। हालाँकि आइंस्टीन को शुरू-शुरू में बोलने में कठिनाई होती थी, लेकिन वे पढाई में अव्वल थे। उनकी मातृभाषा जर्मन थी और बाद में उन्होंने इटालियन और अंग्रेजी सीखी।

आइंस्टाइन एक सैद्धांतिक भौतिकविद् थे। वे सापेक्षता के सिद्धांत और द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण E = mc2 के लिए जाने जाते हैं। आइंसटाइन ने सापेक्षता के विशेष और सामान्य सिद्धांत सहित कई योगदान दिए। उनके अन्य योगदानों में- सापेक्ष ब्रह्मांड, केशिकीय गति, क्रांतिक उपच्छाया, सांख्यिक मैकेनिक्स की समस्याऍ, अणुओं का ब्राउनियन गति, अणुओं की उत्परिवर्त्तन संभाव्यता, एक अणु वाले गैस का क्वांटम सिद्धांतम, कम विकिरण घनत्व वाले प्रकाश के ऊष्मीय गुण, विकिरण के सिद्धांत, एकीकृत क्षेत्र सिद्धांत और भौतिकी का ज्यामितीकरण शामिल है। आइंस्टीन ने पचास से अधिक शोध-पत्र और विज्ञान से अलग किताबें लिखीं।
उन्हें सैद्धांतिक भौतिकी, खासकर प्रकाश-विद्युत ऊत्सर्जन की खोज के लिए 1921 में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

बाल्यकाल से अध्यापकों द्वारा मंद बुद्धी और अयोग्य कहा जाने वाला ये बालक अपने अभ्यास के बल पर ही विश्व में आज सम्मान के साथ जाना जाता है। इस बालक को दुनिया आइंस्टाइन के नाम से जानती है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि साधारण से साधारण व्यक्ति भी मेहनत, हिम्मत और लगन से सफलता प्राप्त कर सकता है।
EINSTEIN की यह कहानी सच्ची लगन का एक EXAMPLE है;मन मे लगन अगर सच्ची हो तो भगवान भी आपके पीछे खड़े हो जाते है और असंभव काम भी संभव हो जाता है।

Albert Einstein की यह कहानी सच्ची लगन की एक example है :

महान वैज्ञानिक Albert Einstein जब भी कोई काम करते थे तो उस काम में खो जाते थे ! उन्हें दूसरे कोई काम की फ़िक्र या होश नहीं रहती थी ! एक दिन वो अपने laboratory में काम कर रहे थे ,तो उनकी पत्नी उनके लिए खाना लेकर आई ! उन्हें काम में खोया हुआ देखकर वो खाना table पर रख कर चली गई, उन्होंने सोचा की जब भी फुर्सत मिलेगी खाना खा लेंगे! साथ ही Albert Einstein के friend काम पर लगे थे , खाने की थाली देखकर उनकी भूंख भड़क गई और वो Albert Einstein को छोड़कर खाना खाने के लिए चले गए ! उन्होंने अपने खाने के साथ Einstein का भी खाना खा लिया , Einstein पूरी लगन के साथ अपने काम में लगे थे, जब उन्होंने अपना काम निपटा लिया तो वह खाना खाने के लिए अपने table के पास गए तो उन्होंने देखा सभी बर्तन खाली पड़े है तब उन्होंने सोचा की शायद मै खाना खा चुका हु और फिर पानी पीकर वापिस अपने काम में लग गए ! ऐसा देख उनके सहयोगी उनके काम के प्रति लगन को देखकर नतमस्तक हो गया ! तो दोस्तों ये होती है काम के प्रति लगन !

गीता मे भगवान कृष्ण कहते है है की उनकी माया को पार करना अत्यंत मुश्किल है। उनकी माया को पार करना या उत्तीर्ण होना हर जीव की लिए मुमकिन नहीं है। लेकिन मन मे लगन अगर सच्ची हो तो भगवान भी आपके पीछे खड़े हो जाते है और असंभव काम भी संभव हो जाता है।

इस बात पर हमेशा पूरा भरोसा रखिए कि अगर आप आप अपने काम में डटे रहते हैं, तो आप ज़रूर कामयाब होंगे!

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