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भारत के प्रमुख आंदोलनकारी और क्रांतिकारी – Freedom fighters of india in Hindi

Freedom fighters of india in Hindi : भारत को एक आजाद देश की पहचान दिलाने के लिए लाखों करोड़ों हिंदुस्तानियों ने अपना खुद का एक-एक कतरा दे दिया. वहीं कुछ ऐसे स्वतंत्रता सेनानी भी थे जो इस आजादी की लड़ाई में एक आग का गोला बन कर उभरे और भारत के दुश्मनों को धूल चटा दी. जब क्रांति की पहली गोली चली तब सिर्फ राष्ट्र धर्म को मद्देनजर रखते हुए उन क्रांतिकारियों को तोप से उड़ा दिया गया लेकिन जाने से पहले जो चिंगारी उन्होंने लगा दी थी वह आग बन कर स्वतंत्रता सेनानियों के मन में जलने लगी. और फिर सब ने मिलकर अंग्रेजों को भारत से बाहर का रास्ता दिखा दिया.

उस समय स्वतंत्रता सेनानियों के जोश और हिम्मत के सामने अंग्रेज अपनी कुछ ना चला पाए और भारत देश छोड़ने पर मजबूर हो गए. उन महान क्रांतिकारियों में कुछ महानायक ऐसे भी थे
जिन्होंने पैसे और ताकत की जगह एक आजाद भारत देश का शहीद होना चुना. उन वीरों ने ही भारत देश में खून के बदले आजादी की भावना और सेना का गठन और अंग्रेजी साम्राज्य को चुनौती देने का साहस पैदा करने वाली चिंगारी पूरे देश में लगाई जिसकी वजह से आज हम एक स्वतंत्र भारत के निवासी कहला सके हैं. आइए अब हम जानते हैं कि कौन है वह भारत के प्रमुख आंदोलनकारी और क्रांतिकारी जिन्होंने हमें आजाद भारत या फिर हम कह सकते हैं आजाद हिंद का तोहफा दिया.

मंगल पांडे

मंगल पांडे का जन्म 30 जनवरी 1827 में उत्तर प्रदेश के बलिया गांव में हुआ. मंगल पांडे बैरकपुर छावनी में बंगाल नेटिव इन्फेंट्री की 34 वी रेजीमेंट में सिपाही रहे. उन्होंने वहां रहते हुए गाय और सुअर की चर्बी वाले कारतूस और अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह की शुरुआत की. मंगल पांडे की मृत्यु 8 अप्रैल 1957 में बैरकपुर में हुई.

रानी लक्ष्मी बाई

रानी लक्ष्मी बाई का जन्म 19 नवंबर 1835 में वाराणसी के भदैनी गांव में हुआ. झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की महान वीरांगना के रूप में जानी जाती हैं। अंग्रेजों की भारतीय राज्यों को हड़पने की नीति के विरोध स्वरूप उन्होंने हुंकार भरी ‘अपनी झांसी नहीं दूंगी’ और अपनी पीठ के पीछे दामोदर राव को कसकर घोड़े पर सवार हो, अंगरेजों के खिलाफ युद्ध का उद्घोष किया। रानी लक्ष्मी बाई की मृत्यु 18 जून 1858, कोटा की सराय, ग्वालियर में हुई.

महात्मा गांधी

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महात्मा गांधी के पूर्व भी शान्ति और अहिंसा की के बारे में लोग जानते थे, परन्तु उन्होंने जिस प्रकार सत्याग्रह, शांति व अहिंसा के रास्तों पर चलते हुए अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया, उसका कोई दूसरा उदाहरण विश्व इतिहास में देखने को नहीं मिलता। महात्मा गांधी की मृत्यु 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में हुई.

रामप्रसाद बिस्मिल

रामप्रसाद बिस्मिल का जन्म 11 जून 1897, को शाहजहांपुर में हुआ. स्वतंत्रता संग्रात सेनानी के साथ बेहतरीन कवि, शायर और लेखक, मैनपुरी षड्यंत्र में शाहजहांपुर के 6 युवक पकड़ाए, जिनके लीडर रामप्रसाद बिस्मिल थे, लेकिन वे पुलिस के हाथ नहीं लग पाए। इस षड्यंत्र का फैसला आने के बाद से बिस्मिल 2 साल तक भूमिगत रहे। और एक अफवाह के तरह उन्हें मृत भी मान लिया गया। इसके बाद उन्होंने एक गांव में शरण ली और अपना लेखन कार्य किया। रामप्रसाद बिस्मिल की मृत्यु 19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर में हुई.

अशफाक उल्ला खां

अशफाक उल्ला खां का जन्म 22 अक्टूबर 1900 ई. को शाहजहांपुर में हुआ. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के साथ हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी में लेखन कार्य, देश में चल रहे आंदोलनों और क्रांतिकारी घटनाओं से प्रभावित अशफाक के मन में भी क्रांतिकारी भाव जागे और उसी समय उनकी मुलाकात मैनपुरी षड्यंत्र के मामले में शामिल रामप्रसाद बिस्मिल से हुई और वे भी क्रांति के जश्न में शामिल हो गए। इसके बाद वे ऐतिहासिक काकोरी कांड में सहभागी रहे। अशफाक उल्ला खां की मृत्यु 19 दिसंबर 1927, फैजाबाद जेल में फांसी से हुई.

भगत सिंह

भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को बावली, पंजाब में हुआ. नौजवान भारत सभा, हिंदुस्तान सोशलिस्ट, प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी , उनका विश्वास था कि उनकी शहादत से भारतीय जनता और उग्र हो जाएगी,लेकिन जबतक वह जिंदा रहेंगे ऐसा नहीं हो पाएगा। इसी कारण उन्होंने मौत की सजा सुनाने के बाद भी माफीनामा लिखने से साफ मना कर दिया था। भगत सिंह की मृत्यु 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में फांसी से हुई.

चंद्रशेखर आजाद

चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को भाबरा, अलीराजपुर में हुआ. हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के प्रमुख सेनापति और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी,चंद्रशेखर आजाद 14 वर्ष की आयु में बनारस गए और वहां एक संस्कृत पाठशाला में पढ़ाई की। वहां उन्होंने कानून भंग आंदोलन में योगदान दिया था। 1920-21 के वर्षों में वे गांधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़े। वे गिरफ्तार हुए और जज के समक्ष प्रस्तुत किए गए। जहां उन्होंने अपना नाम ‘आजाद’, पिता का नाम ‘स्वतंत्रता’ और ‘जेल’ को उनका निवास बताया। उन्होंने आजाद जीवन जिया और बंदी जीवन के बजाय उन्होंने आजाद मौत चुनी. चंद्रशेखर आजाद की मृत्यु 27 फरवरी 1931 को अल्फ्रेड पार्क, इलाहबाद, उत्तरप्रदेश में हुई.

नेताजी सुभाषचंद्र बोस

नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 में हुआ. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी सेनानी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष, आजाद हिंद फौज के सुप्रीम कमांडर, आईसीएस की परीक्षा में उत्तीर्ण करने के बाद सुभाष ने आईसीएस से इस्तीफा दिया। इस बात पर उनके पिता ने उनका मनोबल बढ़ाते हुए कहा- ‘जब तुमने देशसेवा का व्रत ले ही लिया है, तो कभी इस पथ से विचलित मत होना। नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को हुई.

जवाहर लाल नेहरू

जवाहर लाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर, 1889 को इलाहबाद, उत्तरप्रदेश में हुआ. कांग्रेस पार्टी के अंतर्गत, आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री, नेहरू पाकिस्तान और चीन के साथ भारत के संबंधों में सुधार नहीं कर पाए। उन्होंने चीन की तरफ मित्रता का हाथ भी बढ़ाया, लेकिन 1962 में चीन ने धोखे से आक्रमण कर दिया। चीन का आक्रमण जवाहरलाल नेहरू के लिए एक बड़ा झटका था। जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु 27 मई 1964 को हुई.

सरदार वल्लभभाई पटेल

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875, को नडियाद, गुजरात में हुआ. लौह पुरूष माने जाने वाले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और भारत के पहले उपप्रधानमंत्री, सबसे बड़ा योगदान बंटवारे के बाद भारतीय रियासतों के भारत में विलय का है। इसके अलावा सूखाग्रस्त खेड़ा क्षेत्र के किसानों के लिए अंग्रेज सरकार से कर में छूट देने की मांग की। जब अंग्रेज सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया, तो सरदार पटेल, महात्मा गांधी और अन्य लोगों ने किसानों का नेतृत्व किया और उन्हें कर नहीं देने के लिए प्रेरित किया। अंत: में सरकार को झुकना पड़ा और किसानों को कर में राहत दे दी गई। सरदार वल्लभभाई पटेल की मृत्यु 15 दिसंबर 1950 को हुई.

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