diwali essay

दीपावली पर निबंध और महत्व – जानिए क्यों मनाते है दिवाली (Diwali Essay in Hindi)

दीपावली पर निबंध और महत्व – जानिए क्यों मनाते है दिवाली (Diwali Essay in Hindi) : हमारे भारत देश की पहचान त्‍योहार के रंग हैं. हमारे यहां हर त्‍योहार एक उत्‍सव की तरह बनाया जाता है. दीपावली हिन्‍दू धर्म के लोगों का खास त्‍योहार होता है लेकिन इस त्‍योहार को हर धर्म के लोग बहुत धूमधाम से मनाते हैं. बच्‍चों से लेकर बुजुर्गें तक हर कोई इस त्‍योहार का इतंजार बहुत उत्‍सुकता के साथ करते हैं. घरों की सफाई करते हैं. नए साल के कलैंडर के साथ पूरे घर को लाइट से रोशन करते हैं. घर के साथ – साथ बाजारों में भी खूब रौनक देखने को मिलती है. दीपावली दिन घर में खूब पकवान बनते हैं और लोग घर-घर में मिठाई बाटंते है. दीपावली पूजा-पाठ और महालक्ष्‍मी को खुश करने के लिए खास त्‍योहार माना जाता है.

हिन्‍दू धर्म में दीपावली का महत्‍व Essay On Diwali /Deepawali in hindi

दीपवाली का पांच पर्वों का अनूठा त्‍योहार है और हर दिन का अलग- अलग महत्व है. दीपवाली का पहला दिन धनतेरस, दूसरा दिन छोटी दीपावली, तीसरा दिन मुख्य दीपवाली, चौथा दिन बली प्रतिप्रदा या गोर्वधन और पांचवा दिन यम द्वितीया या फिर भाई दूज के नाम से जाना जाता है, भाई दूज का त्‍योहार हिन्दूओं में भाई- बहनों के रिश्ते और जिम्मेदारियों को मजबूती प्रदान करता है.

हिन्दू धर्म में दीपवाली का बहुत महत्‍व है. इस दिन देवी मां लक्ष्मी और भगवान श्री गणेश जी की पूजा की जाती है. ऐसा लोगों का माना है कि दीपावली की पूरी रात मां लक्ष्‍मी धरती में भ्रमण करती है और इस दिन जो भक्‍त पूरी रात जगाकर देवी मां लक्ष्मी की पूजा करता है उस पर मां लक्ष्‍मी धन, बुद्धि और समृद्धि की बरसात करती है. साथ ही इस दिन से व्‍यापारी अपने नई बही खातों की पूजा करते हैं. दीपावली के दिन जुआ खेलने का भी बहुत महत्व है. लोगों का ऐसा कहना है कि इस दिन देवी पार्वती और भगवान शिव पासों से खेले थे और इसी मिथक के साथ पूरे साल समृद्धि पाने के लिए कुछ घरों में दीपवाली की रात जुआ खेला जाता है.

दीपावली क्‍यों मनाई जाती है

यह बात हर किसी को पता है कि दीपावली का त्‍योहार क्‍यों मनाया जाता है. रघुवंशी श्री भगवान राम जब रावण पर विजय पाकर और 14 साल का अपना वनवास पूरा करके पत्‍नी सीता और भाई लक्ष्‍मण के साथ अपनी अयोध्या नगरी लौटे थे तो नगरवासियों ने इस खुशी में अयोध्‍या को साफ-सुथरा करके कार्तिक अमावस्‍या के घाने अंधकार को दूर करने के लिए दीपकों की ज्‍योति से रोशनी करके पूरी नगरी को दूल्‍हन की तरह सजा दिया था. साथ ही खुशी में हर घर में पकवान बनाए गए थे और घर-घर मिठाईयां बांटी गई थी.
दीपावली से जुड़ी सिर्फ ये ही एक कथा नहीं है बल्कि कई ऐसी और प्रसिद्ध कथा भी है जो शायद ही अपने सुनी हो. तो चलिए आज हम आप को बताते हैं. दो और प्रसिद्ध कथा जो दीपावली से जुड़ी हैं.

पहली प्रसिद्ध कथा

एक बार राजा से एक ज्योतिषी ने भविष्‍यवाणी करते हुए कि कार्तिक अमावस्या की आधी रात को आपका अभाग्य एक सांप के रूप में आने वाला है. ज्योतिषी की बात सुनकर राजा चिंता में आ गया, जिसके बाद उसने अपनी प्रजा को आदेश दिए कि वह अपने घरों को अच्छी तरह से साफ करें और कार्तिक अमावस्या को पूरे नगर को दीपक की रोशनी में रात भर प्रकाशित किया करें. वहीं दूसरी तरफ राजा की पत्‍नी रानी सांप देवता का गुणगान करती और जागती रही. लेकिन दुर्भाग्य की घड़ी में राजा के बिस्तर के पास जलता हुआ दीप अनायास बुझ गया और सांप ने आकर राजा को डस लिया. परंतु सांप देवता ने रानी का स्वर सुना जिसके बाद वह अत्यंत खुश हुआ और रानी को एक वरदान मांगने को कहा, जिसपर रानी ने सांप देवता से वरदान के रूप में अपने पति का जीवनदान मांग लिया.

फिर सर्प देवता राजा के प्राण वापस लाने के लिए यम के पास चले गए. यम ने जब राजा का जीवनमंत्र पढ़ा तो शून्य नंबर दिखाई दिया. जिसका अर्थ यह हुआ कि राजा पृथ्वी पर अपना जीवन समाप्त कर चुका है. लेकिन सांप ने बड़ी चतुराई से आगे सात नंबर डाल दिया और जब यम ने पत्र देखा तो कहा, लगता है कि मृत शरीर को अपने जीवन के 70 साल और देखना है. यम ने तभी राजा के प्राण जल्दी वापस ले जाने के आदेश दिए. जिसके बाद सांप राजा की आत्मा को वापस ले आया. राजा के प्राण वापस आने पर बस उसी दिन से दीपावली का पर्व राजा के पुनर्जीवित होने की खुशी में मनाया जाता है.

दूसरी प्रसिद्ध कथा

एक बार की बात है, राक्षस दैत्यराज बलि, देवताओं के राजा इन्द्र देव से डर कर कहीं जाकर छुप गए, जिसके बाद इन्‍द्र राक्षस को ढूंढते हुए एक खाली घर में पहुंच गए. उस खाली घर में राक्षस दैत्यराज बलि एक गधे के रूप में छुपे हुए थे. दोनों की आपस में बातचीत होने लगी. उन दोनों की बातचीत के बीच दैत्यराज बलि के शरीर से एक स्त्री बाहर निकल गई.

उस स्‍त्री से इन्‍द्र के पूछा, आप कौन है. जिस पर स्त्री ने कहा कि ‘मै, देवी लक्ष्मी हूं. मैं स्वभाव वश एक स्थान पर टिककर नहीं रहती हूं’. फिर स्‍त्री के रुप में प्रकट हुई मां लक्ष्‍मी ने कहा कि मैं उसी स्थान पर स्थिर होकर रहती हूं, जहां सत्य, दान, व्रत, तप, पराक्रम और धर्म होता है. जो लोग सत्यवादी होते हैं, ब्राह्मणों का हितैषी होते हैं, धर्म की मर्यादा का पालन करते हैं, मैं उसी के घर में निवास करती हूं. इस बात से स्‍पष्‍ट होता है कि मां लक्ष्मी केवल वहीं स्थायी रूप से निवास करती है, जहां अच्छे गुणी व्यक्ति निवास करते हैं.

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