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अशोक गहलोत का जीवन परिचय | Ashok Gehlot Biography in hindi

Ashok Gehlot Biography in hindi : आज हम एक ऐसे व्यक्ति की बात करने जा रहे हैं जिस से हर कोई प्रखर वक्ता नहीं हैं, नहीं उस व्यक्ति की भाषा में कोई अलंकार होता है लेकिन जब वह बोलता हैं, शब्द निशाने पर अपने आप ही पहुंच जाते हैं. आज हम बात करेंगे राजस्थान (Rajasthan) के नए मुख्यमंत्री (Chief Minister) अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की. जानेगें उनके जीवन के कुछ किस्से और अब
तक का राजनीतिक (Politics) सफ़र के बारे में.

अशोक गहलोत का जन्म

हाल ही राजस्थान (Rajasthan) में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की और राजस्थान (Rajasthan) की कमान अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) को सौंपने का फैसला किया है. अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) , राजस्थान (Rajasthan) में कांग्रेस (Congress) के कद्दावर नेता माने जाते हैं. 3 मई 1951 को राजस्थान (Rajasthan) के जोधपुर में मशहूर जादूगर लक्ष्मण सिंह गहलोत के घर अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) का जन्म हुआ और वह राजनीतिक में यह साबित करते रहे हैं कि वह जादूगर के बेटे हैं क्योंकि पिछले चार दशक के करियर में कई मौकों पर अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने राजनीतिक ‘जादू’ दिखांए हैं.

अशोक गहलोत की शादी

राजस्थान (Rajasthan) के सीएम (CM) अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने 27 नवंबर 1977 को सुनीता गहलोत से शादी की. जिस के बाद उन्हें दो संतानें हुई, एक बेटा और एक बेटी. एक बेटे का नाम वैभव तो बेटी का नाम सोनिया है.

राजनीतिक सफ़र की शुरूआत

राजनीति में अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) को उन लोगों में शुमार किया जाता है जो समाज सेवा के ज़रिए राजनीति में दाख़िल हुए हैं और फिर जनता की सेवा कर के ऊँचाई तक पहुंचे हैं. यह साल 1971 की बात है जब जोधपुर का एक नौजवान बांग्लादेशी शरणार्थियों के शिविर में काम करते दिखाई दिया था. इस से पहले अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) वर्ष 1968 से 1972 के बीच गाँधी सेवा प्रतिष्ठान के साथ सेवा ग्राम में काम कर चुके थे. जानकार बताते हैं कि सेवा कार्य के भाव ने ही अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की पहुंच इंदिरा गाँधी (Indira Gandhi) तक कराई थी.

अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने जीवन का पहला चुनाव जोधपुर विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष का लड़ा था. जब वह कांग्रेस (Congres) के नए राष्ट्रीय छात्र संगठन से जुड़े, उस वक़्त वह अर्थशास्त्र में एम.ए. (MA) के विद्यार्थी थे. एनएसयूआई (NSUI) से राजनीति सफर की शुरूआत की और फिर बाद में यूथ कांग्रेस (Youth Congress) और सेवा दल से होते हुए कांग्रेस (congress) की मुख्य धारा में पहुंचे हैं. अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) 34 साल की उम्र में राजस्थान (Rajasthan) प्रदेश के अध्यक्ष बने थे.

तीन पीढ़ियों की सियासत के गवाह

अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) कांग्रेस (Congess) पार्टी के एक ऐसे नेता हैं. जिस ने कांग्रेस (Congress) की कई पीढ़ियों की सियासत देखी है और उन्होंने तीन-तीन प्रधानमंत्रियों (Prime Ministers) के मंत्रिमंडल में काम कर चुके हैं. अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) , राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) और नरसिम्हा राव के मंत्रिमंडल में शामिल रहे हैं. गहलोत नेहरू परिवार और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के भरोसेमंद नेताओं (Ministers) में शुमार हैं.

पहला चुनाव हार गए

हमेशा से खादी के परिधान में दिखने वाले अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने साल 1977 में जब पहली बार कांग्रेस (Congress) की टिकट पर जोधपुर (Jodhpur) से विधानसभा का चुनाव (Elections) लड़ा तो साढ़े चार हज़ार वोटों से वह हार गए. लेकिन वह निराश नहीं हुए बल्कि अगले ही दिन उन्हें चुनावी इलाक़े में घूम-घूमकर मतदाताओं (Voters) का आभार व्यक्त करते देखा गया.

लेकिन फिर गहलोत पहली बार साल 1980 में जोधपुर (Jodhpur) से सांसद चुने गए. गहलोत ने पांच बार संसद में जोधपुर (Jodhpur) का प्रतिनिधित्व किया है. साल 1982 में पहली बार वह इंदिरा गाँधी (Indira Gandhi) मंत्रिमंडल में उप-मंत्री बने. जब वह उप—मंत्री की शपथ लेने गए तो एक तिपहिया में बैठ कर गए. साल 1991 में उन्हें कपड़ा मंत्री बनाया गया तो वहां भी उन्होंने कई सराहनीय काम किए जिनकी तारीफ़ आज भी की जाती है. अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) केंद्र में मंत्री (Minister) रहने के अलावा दो बार मुख्यमंत्री (Chief Minsiter) और तीन मर्तबा प्रदेश कांग्रेस (Congress) के अध्यक्ष (President) रहे हैं.

कांग्रेस में नया चलन शुरू किया

कांग्रेस पार्टी (Congress Party) संगठन में अपने कार्यकाल के दौरान अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने पार्टी कार्यक्रमों में गलहार के रूप में सूत की माला के प्रयोग का चलन शुरू किया था. इस के साथ ही पार्टी के पुराने नेताओं और स्वाधीनता सेनानियों के जन्मदिन (Birthday) पर उन्हें याद करने की परम्परा शुरू की गई. जब अशोक गहलोत पहली मर्तबा राज्य कांग्रेस (congress) के प्रमुख बने तब गहलोत (Gehlot) ने ब्लॉक-तहसील स्तर पर बड़ी संख्या में प्रकोष्ठ गठित कर संगठन का विस्तार किया था.

गहलोत लोप्रोफाइल नेता (Minister)

67 साल के अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की गिनती लो-प्रोफाइल (Low Profile) नेताओं में होती है क्योकि वह अक्सर तड़क-भड़क से दूर रहते हैं मगर राजनीतिक समर्थकों की फौज से हमेशा घिरे रहते हैं. उनके करी​बी बताते हैं​ कि अशोक (Ashok) 24 घंटे अपने कार्यकर्ताओं के लिए उपलब्ध रहते हैं और उन तक फोन से भी पहुंचना आसान है. वह ऐसे नेता हैं जो सादगी पसंद करते हैं. उन करीबी से यह जानकारी मिलती है कि वह चुनाव (Elections) प्रचार के वक्त अपनी गाड़ी में पारले-जी (Parle- G) बिस्कुट रखते हैं तो वहीं कहीं भी सड़क पर उतर कर चाय-पानी करने के बहाने जनता की नब्ज भांपने की कला का अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) बखूबी इस्तेमाल करने में माहिर हैं.

अशोक गहलोत की ईमानदारी चढ़ी कसौटी पर

विज्ञान और कानून (Law) से ग्रेजुएशन (Graduations) के बाद अर्थशास्त्र से एमए (MA) की पढ़ाई करने वाले अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के इमानदारी के भी कई किस्से मौजूद हैं. जानकारों के मुताबिक़ एक मर्तबा उन्हें जम्मू – कश्मीर (Jammu – Kashmir) के चुनावों में एक क्षेत्र का प्रभारी बनाकर भेजा गया था. इस के उन्हें कुछ धनराशि भी दी गई थी. लेकिन चुनाव (Election) के बाद बची धनराशि (Money) खुद के पास नहीं रखी बल्कि चुनाव के तुरंत बाद ही अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने पाई-पाई का हिसाब दिया और बचे हुए पैसे पार्टी में वापस जमा करावा दिए.